
रीवा।
पति की दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाएं 20 अक्टूबर रविवार को निर्जला करवा चौथ व्रत करेंगीं। व्रतधारी महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर रात्रि के समय व्रत का पारण करेंगीं। रविवार को चंद्रोदय रात्रि को आठ बजकर 18 मिनिट के लगभग होगा। इसकी प्रतीक्षा सज-संवरकर चांदनी की तरह खिली व्रतधारी महिलाओं को बेसब्री से रहेगा। शनिवार को महिलाओं ने व्रत की तैयारी की। हाथों में मेहंदी लगाई और व्रत के पूजन के लिए परिधान धारण किए। महिलाओं ने पूजन सामग्री के साथ श्रृंगार के सामान की खरीदारी की। जिन महिलाओं का करवा चौथ का व्रत हैं, उनके लिए मायके पक्ष ने वस्त्र सहित अन्य सामग्री उपहार स्वरूप भेजी। पंजाबी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने सामूहिक करवा चौथ के पूजन के कार्यक्रम का आयोजन किया है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत गजकेसरी व शश योग में मनेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस साल करवा चौथ पर पूजा के लिए केवल एक घंटा 16 मिनट का ही शुभ मुहूर्त है। यह व्रत महिलाओं के लिए बेहद कठिन होता है, क्योंकि इस दिन वे निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रोदय के बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ पर पांच शुभ योग
करवा माता और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में इस पर्व को पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत व्यतिपात योग और कृतिका नक्षत्र में रखा जाएगा। करवा माता की आराधना करके पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखा जाता है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने व छलनी की ओट से पति को देखने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। इस बार यह व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पांच शुभ योग बन रहे हैं, जिसका लाभ वृषभ, कन्या और तुला राशियों को विशेष रूप से होने वाला है। ज्योतिष के अनुसार, अबकी बार सूर्य और बुध दोनों ही ग्रह शुक्र की राशि तुला में है। ऐसे में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही शुक्र के वृश्चिक राशि में आने वह गुरु के साथ मिलकर समसप्तक योग का निर्माण कर रहे हैं। शनि अपनी राशि कुंभ में रहकर शश राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। चंद्रमा वृषभ राशि में गुरु के साथ युति करके गजकेसरी राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि
20 अक्तूबर को सुबह छह बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी, तिथि का समापन 21 अक्तूबर को सुबह चार बजकर 17 मिनट पर होगा। चंद्र उदय का समय 20 अक्टूबर को शाम 8 बजकर 18 मिनट पर है।
चंद्रदर्शन से पहले करवा माता की पूजा होगी
व्रतधारी चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले विधि-विधान के साथ व्रत का शुभ फल प्राप्त करने के लिए करवा माता की पूजा व्रतधारी महिला करेंगीं। करवा माता को वस्त्र और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाएंगीं और करवा चौथ की कथा का श्रवण करेंगीं। ये सामग्री दान में दी जाएंगी। इसके बाद चंद्रोदय होने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु व सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करेंगीं। चंद्रदेव की पूजा के बाद छलनी में चंद्रदेव और पति के दर्शन करेंगीं। उसके बाद करवा से पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगीं।
